जब एक अनिवासी भारतीय (NRI) निवेशक आपसे किसी म्यूचुअल फंड योजना में निवेश करने का परामर्श लेता है, तो चर्चा केवल फंड के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अक्सर, एक MFD के रूप में आपको यह सुनने को मिलता है कि निवेशक अपने गृह देश और भारत के बीच दोहरे कराधान से बचना चाहता है। यहाँ पर ‘कर निवास प्रमाण पत्र’ या टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उभरता है।
यह प्रमाण पत्र उस देश के कर प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाता है जहाँ निवेशक वर्तमान में कर का भुगतान कर रहा है, और यह इस बात का आधिकारिक प्रमाण है कि वह व्यक्ति या इकाई उस देश की निवासी है।
जब म्यूचुअल फंड हाउस अनिवासी निवेशक पर विथहोल्डिंग टैक्स (WHT) की दरें तय करता है, तो वह आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की सामान्य दरों को लागू करता है। हालाँकि, यदि भारत ने उस विशिष्ट देश के साथ दोहरा कर निवारण करार (DTAA) किया है, तो निवेशक उस संधि के अंतर्गत मिलने वाली रियायती कर दरों का दावा कर सकता है। लेकिन यह रियायत स्वतः प्राप्त नहीं होती।
फंड हाउस तब तक ही कम दर लागू करेगा जब तक कि निवेशक अपना वैध TRC और ‘स्व-घोषणा पत्र’ (Self-Declaration) प्रस्तुत नहीं कर देता। एक MFD के नाते, आपका यह कर्तव्य है कि आप समय रहते निवेशक को इन दस्तावेजों की आवश्यकता के बारे में सूचित करें, ताकि निवेश प्रक्रिया के समय अनावश्यक कर कटौती न हो।
इस प्रक्रिया में MFD की भूमिका केवल फॉर्म भरवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि निवेशक को सही कर लाभ मिले। यदि आप एक ऐसे अनिवासी निवेशक की सहायता कर रहे हैं जो संयुक्त अरब अमीरात या सिंगापुर जैसे देशों में कार्यरत है, तो DTAA की शर्तों को समझना आपके लिए अनिवार्य हो जाता है।
यदि निवेशक समय पर TRC प्रदान करने में विफल रहता है, तो उसे अपनी रिडेम्पशन राशि या लाभांश पर उच्च कर का भुगतान करना पड़ सकता है, जो अंततः उसकी निवेश योजना को प्रभावित करता है। याद रखें, सटीक कर योजना निवेश के चयन जितनी ही महत्वपूर्ण है, और कागजी अनुपालन में एक छोटी सी चूक निवेशक की कुल प्राप्ति को काफी कम कर सकती है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक अनिवासी निवेशक जो भारत के साथ DTAA संधि वाले देश में रहता है, म्यूचुअल फंड से लाभांश प्राप्त करता है। संधि के तहत कम कर दर का लाभ उठाने के लिए निवेशक को क्या करना चाहिए?
यदि कोई अनिवासी निवेशक अपना वैध TRC प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो म्यूचुअल फंड हाउस पर कर कटौती के संदर्भ में क्या दायित्व है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘8.8 — स्रोत पर कर कटौती’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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