एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में, अक्सर आपके पास ऐसे निवेशक आते हैं जो लाभांश (IDCW) के विकल्पों को केवल इसलिए चुनते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह आय का एक ‘अतिरिक्त और कर-मुक्त’ स्रोत है। जब आप एक उच्च वेतनभोगी पेशेवर को देखते हैं जो 30 प्रतिशत के कर स्लैब में है, तो उन्हें लाभांश विकल्प का सुझाव देना एक गंभीर चूक हो सकती है।
पुरानी व्यवस्था में, फंड हाउस लाभांश वितरण कर (DDT) काटते थे, जिससे निवेशक की शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) कम हो जाती थी। अब, फरवरी 2020 के बाद के नियमों के अनुसार, लाभांश निवेशक की कुल आय में जुड़ता है और उनके व्यक्तिगत आयकर स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है।
एक जिम्मेदार MFD के नाते, आपकी भूमिका यहाँ आंकड़ों के खेल को समझना और निवेशक को समझाना है। उदाहरण के लिए, यदि एक निवेशक 30 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में आता है और उसे 10,000 रुपये का लाभांश मिलता है, तो उसे उस राशि पर अपने स्लैब के अनुसार कर देना होगा।
इसके विपरीत, यदि कोई सेवानिवृत्त व्यक्ति या चैरिटेबल ट्रस्ट है जिसकी आय छूट सीमा से नीचे है, तो उनके लिए यह लाभांश कर-कुशल हो सकता है क्योंकि वे कर रिफंड का दावा कर सकते हैं या उनकी कुल कर देयता कम हो सकती है।
आपको यह विश्लेषण करना चाहिए कि क्या लाभांश का भुगतान उनकी पूंजी को तो नहीं खा रहा, विशेषकर तब जब 1 अप्रैल 2021 से लाभांश के वितरण में पूंजी के हिस्से की पहचान करना अनिवार्य हो गया है।
यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि विकास (Growth) विकल्प किस प्रकार कर-स्थगन (tax-deferment) का लाभ देता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए, ग्रोथ विकल्प चक्रवृद्धि की शक्ति को बिना किसी वार्षिक कर बाधा के कार्य करने देता है। एक MFD के रूप में, आपकी सार्थकता इसी बात में है कि आप निवेशक को केवल ‘नकदी की प्राप्ति’ के मोह से हटाकर ‘कर-पश्चात रिटर्न’ (post-tax return) की वास्तविकता दिखाएं।
आपकी सिफारिशें केवल रिटर्न के आंकड़ों पर आधारित न होकर, निवेशक की व्यक्तिगत कर स्थिति और उसके वित्तीय लक्ष्यों के अनुकूल होनी चाहिए। याद रखें कि एक सूचित निर्णय ही लंबी अवधि में निवेशक का विश्वास और पोर्टफोलियो की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक उच्च निवल मूल्य वाले निवेशक (HNI), जो 30 प्रतिशत आयकर स्लैब में आते हैं, ने अपने पोर्टफोलियो में IDCW विकल्प चुना है। उनके लिए इस विकल्प का प्रमुख कर निहितार्थ क्या है?
यदि कोई पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट म्यूचुअल फंड से लाभांश प्राप्त करता है, तो नई कर व्यवस्था के तहत उनके लिए सबसे बड़ी राहत क्या है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘8.3 — आईडीसीडबल्यू (IDCW) विकल्प (लाभांश आय)’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
कॉपीराइट (स्वत्वाधिकार) © २०२६ `अखिलेश गुरुरानी. सर्वाधिकार सुरक्षित.