एक निवेशक आपके कार्यालय में आता है और यह दावा करता है कि उसने पिछली तिमाही में म्यूचुअल फंड से जो लाभांश प्राप्त किया है, वह पूरी तरह कर-मुक्त है। एक MFD के रूप में, यहाँ आपकी पहली जिम्मेदारी उन्हें यह स्पष्ट करना है कि 1 अप्रैल 2021 से लाभांश के कराधान का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।
अब लाभांश प्राप्त करना केवल नकदी प्रवाह का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह निवेशक की कुल कर योग्य आय का हिस्सा बन जाता है। यदि निवेशक उच्च कर स्लैब में है, तो उन्हें लाभांश आय पर अपनी लागू कर दर से कर का भुगतान करना होगा, जो अंततः उनके हाथ में आने वाले वास्तविक लाभ को काफी कम कर सकता है।
परीक्षा के दृष्टिकोण और व्यावहारिक अभ्यास में, यह समझना अनिवार्य है कि म्यूचुअल फंड हाउस द्वारा वितरित लाभांश अब निवेशक की कुल आय में जुड़ता है। पहले की लाभांश वितरण कर (DDT) व्यवस्था में, फंड हाउस ही कर का भुगतान कर देते थे, जिससे निवेशक को ‘कर-मुक्त’ लाभांश मिलता था।
वर्तमान प्रणाली में, यदि निवेशक की वार्षिक आय अधिक है, तो लाभांश पर टीडीएस (TDS) काटने की प्रक्रिया और उस पर लगने वाले कर का बोझ निवेशक को स्वयं वहन करना पड़ता है। MFD के तौर पर आपका यह दायित्व है कि आप निवेशक को समझाएं कि लाभांश का अर्थ लाभ का वितरण नहीं, बल्कि उनकी अपनी निवेशित पूंजी का ही एक हिस्सा वापस मिलना हो सकता है।
उदाहरण के लिए, एक सेवानिवृत्त व्यक्ति जो अधिक लाभांश देने वाली स्कीमों को चुनता है, उसे यह गणना जरूर देखनी चाहिए कि कर कटने के बाद उनके हाथ में वास्तव में कितना बचा। यदि वे वृद्धि (Growth) विकल्प का चयन करते हैं, तो वे न केवल कर-स्थगन (Tax Deferment) का लाभ उठाते हैं, बल्कि लंबी अवधि में चक्रवृद्धि (Compounding) की शक्ति का भी बेहतर लाभ ले सकते हैं।
आपका कार्य निवेशक को केवल लाभांश की मनोवैज्ञानिक संतुष्टि से निकालकर उनके पोर्टफोलियो के कर-पश्चात रिटर्न की वास्तविकता से परिचित कराना है। एक MFD तभी अपनी सार्थकता सिद्ध करता है जब वह निवेशक को कर दक्षता (Tax Efficiency) के आधार पर सही वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक उच्च कर स्लैब वाले निवेशक को म्यूचुअल फंड के लाभांश विकल्प और विकास विकल्प के बीच चयन करने में मदद करते समय, एक MFD के रूप में आपकी प्राथमिक सलाह क्या होनी चाहिए?
1 अप्रैल 2021 से, यदि कोई म्यूचुअल फंड हाउस लाभांश वितरित करता है, तो उसे क्या स्पष्ट करना अनिवार्य है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘8.3 — आईडीसीडबल्यू (IDCW) विकल्प (लाभांश आय)’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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