म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं कठिनाई स्तर: मध्यम (Intermediate) पढ़ने का समय: 2 मिनट
📌 Chapter 7.2 — म्यूचुअल फ़ंड स्कीम के नेट एसेट और NAV की गणना

एक निवेशक आपके कार्यालय आता है और एक ऐसी हाइब्रिड फंड योजना का विवरण दिखाता है जिसमें ऊंचे कूपन दर वाले पर्पेचुअल बॉन्ड्स (Perpetual Bonds) को प्रमुखता दी गई है। उसे लगता है कि ये बॉन्ड्स फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर हैं क्योंकि इनमें ब्याज दर अधिक है और इनकी कोई निश्चित परिपक्वता तिथि नहीं है।

यहाँ एक MFD के रूप में आपकी भूमिका यह है कि आप उन्हें समझाएं कि ‘कोई निश्चित परिपक्वता तिथि न होना’ केवल एक लाभ नहीं, बल्कि एक बड़ा जोखिम भी है। पर्पेचुअल बॉन्ड्स या एटी-1 (AT-1) बॉन्ड्स में निवेश करते समय, स्कीम को उन बॉन्ड्स की तरलता और जारीकर्ता की साख पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

पर्पेचुअल बॉन्ड्स की सबसे बड़ी सीमा उनकी अनिश्चितता है। चूँकि इन बॉन्ड्स का कोई अंत नहीं होता, इसलिए इनका मूल्य केवल बाजार की ब्याज दरों में बदलाव से ही नहीं, बल्कि जारीकर्ता बैंक की पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio) से भी प्रभावित होता है। यदि बैंक का प्रदर्शन गिरता है या उसे अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होती है, तो नियामक संस्थाओं के नियमों के अनुसार इन बॉन्ड्स का मूल्य शून्य तक भी गिर सकता है।

एक MFD के लिए यह आवश्यक है कि वह निवेशक के पोर्टफोलियो में ऐसी योजनाओं को केवल तब ही जगह दे, जब निवेशक की जोखिम सहने की क्षमता उच्च हो और वह बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो।

उदाहरण के लिए, यदि एक फंड मैनेजर ने अपने कॉर्पोरेट बॉन्ड पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा पर्पेचुअल बॉन्ड्स में लगा रखा है, तो बाजार में क्रेडिट क्राइसिस के दौरान NAV में अचानक भारी गिरावट आ सकती है। निवेशक इसे केवल बाजार की गिरावट समझकर घबरा सकता है, लेकिन वास्तविकता में यह उस अंतर्निहित परिसंपत्ति के जोखिम का प्रतिबिंब होता है।

इसलिए, किसी भी हाइब्रिड या डेट फंड का चयन करते समय, पोर्टफोलियो के भीतर इन जटिल उपकरणों की सीमा को समझना अनिवार्य है। एक समझदार MFD हमेशा निवेशक को यह चेतावनी देता है कि उच्च प्रतिफल (yield) हमेशा उच्च जोखिम का संकेत होता है, न कि मुफ्त का लाभ।


💡सूक्ष्म बिंदु

⚠️ Nuance
परीक्षार्थी अक्सर यह भूल जाते हैं कि पर्पेचुअल बॉन्ड की ‘अनिश्चितता’ को केवल ब्याज दर के जोखिम (interest rate risk) से जोड़कर देखते हैं, जबकि इसका असली जोखिम क्रेडिट जोखिम (credit risk) और लिक्विडिटी रिस्क से जुड़ा है। यह एक भ्रांति है कि क्योंकि इनका कूपन रेट अधिक है, इसलिए ये हर निवेशक के लिए उपयुक्त हैं। एक MFD को यह याद रखना चाहिए कि जटिल बॉन्ड्स का मूल्यांकन और उनमें निवेश की सीमाएं केवल गणितीय नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निर्णय हैं जो सीधे तौर पर स्कीम की स्थिरता को प्रभावित करती हैं।

🧠 ज्ञान परखें

Practice Question 1

एक म्यूचुअल फंड स्कीम में पर्पेचुअल बॉन्ड्स निवेश की प्राथमिक सीमा क्या है?

Practice Question 2

जब एक बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) गिरता है, तो उसके द्वारा जारी एटी-1 (AT-1) बॉन्ड्स का NAV पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?


यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘7.2 — म्यूचुअल फ़ंड स्कीम के नेट एसेट और NAV की गणना’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।

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