कल्पना कीजिए कि आपके एक निवेशक ने अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा एक डेट म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश किया है। अचानक बाजार में एक खबर आती है कि उस फंड के पोर्टफोलियो में शामिल एक कॉर्पोरेट बॉन्ड जारीकर्ता (Issuer) ने भुगतान में चूक (Default) कर दी है। एक MFD के रूप में, यह आपके लिए एक अत्यंत तनावपूर्ण स्थिति होती है क्योंकि निवेशक घबराहट में अपना पैसा निकालना चाहते हैं।
यहीं पर सेबी (SEBI) का ‘सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो’ (Segregated Portfolio) का नियम एक मसीहा के रूप में काम आता है और यह सुनिश्चित करता है कि संकट के समय फंड की तरलता (Liquidity) पूरी तरह समाप्त न हो जाए।
सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो का सरल अर्थ है किसी स्कीम के पोर्टफोलियो को दो भागों में बांटना। एक भाग ‘मेन पोर्टफोलियो’ कहलाता है जिसमें सभी स्वस्थ परिसंपत्तियां (Assets) होती हैं, और दूसरा ‘सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो’ होता है जिसमें जोखिम वाली या डिफॉल्ट वाली संपत्ति को अलग कर दिया जाता है। जब कोई क्रेडिट इवेंट घटित होता है, तो फंड हाउस उसी समय उस विशेष संकटग्रस्त बॉन्ड को अलग कर देता है।
इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जो निवेशक स्कीम में बने रहना चाहते हैं, वे अपनी शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) में अचानक भारी गिरावट से बच जाते हैं, क्योंकि खराब संपत्ति का प्रभाव केवल अलग किए गए पोर्टफोलियो तक ही सीमित रहता है।
एक पेशेवर MFD के रूप में, आपको यह समझना चाहिए कि यह व्यवस्था केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह निवेशक के विश्वास को बनाए रखने का एक उपकरण है। जब आप अपने निवेशक को यह समझाते हैं कि उनकी मुख्य निवेश राशि सुरक्षित है और केवल डिफॉल्ट वाली संपत्ति को अलग किया गया है, तो आप उनकी घबराहट को शांत कर पाते हैं।
यदि सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो की यह सुविधा न होती, तो पूरी स्कीम की NAV एक साथ गिर जाती, जिससे सभी निवेशकों को एक समान नुकसान उठाना पड़ता। इसके बजाय, अब निवेशकों को अलग किए गए पोर्टफोलियो के यूनिट्स मिलते हैं, और जब भी वह डिफॉल्ट कंपनी पैसे चुकाती है, तो वह पैसा सीधे निवेशकों को वापस कर दिया जाता है।
यह प्रणाली निवेश में पारदर्शिता और न्याय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह सुनिश्चित करती है कि जिस निवेशक ने सही फंड चुना है, उसे किसी एक खराब कॉर्पोरेट बॉन्ड के कारण पूरी तरह से हतोत्साहित न होना पड़े। इस तंत्र को समझकर आप न केवल एक तकनीकी विशेषज्ञ बनते हैं, बल्कि बाजार के अस्थिर समय में अपने निवेशक के लिए एक विश्वसनीय मार्गदर्शक भी साबित होते हैं।
याद रखें, एक MFD की असली पहचान बाजार की स्थिरता में नहीं, बल्कि ऐसे कठिन समय में निवेशक को धैर्य बंधाने और सही स्थिति स्पष्ट करने में निहित है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक म्यूचुअल फंड स्कीम में क्रेडिट इवेंट होने पर ‘सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो’ बनाने का मुख्य विनियामक उद्देश्य क्या है?
यदि किसी स्कीम में सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो बनाया जाता है, तो उस विशेष समय में स्कीम के निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘4.2 — भारत में प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की भूमिका’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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