एक सेवानिवृत्त निवेशक आपके कार्यालय में आते हैं और दस वर्ष पुरानी एक ऐसी म्यूचुअल फंड फोलियो की रसीद निकालते हैं जिसे वे पूरी तरह भूल चुके थे। उन्हें चिंता है कि क्या उनका वह निवेश अब सुरक्षित है या उसका क्या हुआ होगा।
एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में, यहाँ आपकी भूमिका केवल निवेश की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह समझाने की भी है कि प्रणाली में ‘अदावित राशि’ (Unclaimed Amount) का प्रबंधन कैसे किया जाता है।
सेबी (SEBI) ने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाए हैं कि यदि निवेशक लंबे समय तक अपना पैसा या डिविडेंड नहीं लेते, तो वह किसी के लिए भी कमाई का जरिया न बने, बल्कि वह पैसा निवेशक के लिए ही सुरक्षित रहे।
जब भी कोई निवेशक अपनी राशि का दावा तीन वर्षों के बाद करता है, तो उसे केवल मूल राशि ही नहीं दी जाती, बल्कि उस पर अर्जित लाभ भी मिलता है। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को यह अनिवार्य रूप से करना होता है कि वे ऐसी राशियों को एक अलग खाते में रखें और उस पर मिलने वाले निवेश प्रतिफल को उसी खाते में जोड़ें।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक का पैसा लिक्विड फंड (Liquid Fund) में था और वह पैसा अदावित श्रेणी में चला गया, तो तीन साल बाद जब वह निवेशक वापस आता है, तो उसे उस राशि पर लिक्विड फंड की वृद्धि का लाभ मिलता है। यह पारदर्शिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ बाजार की गिरावट या उतार-चढ़ाव का बोझ निवेशक पर नहीं डाला जाता, बल्कि उनके पैसे को सुरक्षित और सक्रिय बनाए रखा जाता है।
एक MFD के लिए यह समझना अनिवार्य है कि अदावित राशियों का प्रबंधन कैसे होता है, क्योंकि यह आपके प्रति निवेशक का विश्वास मजबूत करता है। यदि आप अपने क्लाइंट को बता सकें कि उनका पुराना निवेश नियमबद्ध तरीके से सुरक्षित रखा गया है और उस पर रिटर्न भी जमा हुआ है, तो आप एक पेशेवर के रूप में अपनी साख स्थापित करते हैं।
यह प्रक्रिया दर्शाती है कि भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग केवल नए निवेश जुटाने के बारे में नहीं है, बल्कि पुराने निवेशकों की संपत्ति की सुरक्षा और उन्हें वापस मुख्यधारा में लाने के लिए भी कटिबद्ध है। हमेशा ध्यान रखें कि एक डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में आपका ज्ञान ही निवेशक के लिए अनिश्चितता को विश्वास में बदलने का सबसे बड़ा साधन है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक निवेशक अपनी अदावित राशि का दावा 5 वर्षों के बाद करता है। एसेट मैनेजमेंट कंपनी भुगतान किस प्रकार करेगी?
म्यूचुअल फंड में अदावित राशि (Unclaimed Amount) को लेकर एक MFD को कौन सी प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘4.2 — भारत में प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की भूमिका’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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