आपके कार्यालय में एक निवेशक आता है जिसके पास पाँच अलग-अलग नामों वाले फंड हैं, लेकिन जब आप गहराई से उनका विश्लेषण करते हैं, तो पाते हैं कि वे सभी एक ही प्रकार के शेयरों में निवेश कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में, एक MFD के रूप में आपकी भूमिका केवल फंड की बिक्री तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होता है कि निवेशक की संपत्ति का आवंटन वास्तव में विविध है।
यहाँ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के म्यूचुअल फंड स्कीम वर्गीकरण (Categorization) के नियम आपके सबसे शक्तिशाली उपकरण के रूप में सामने आते हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह है कि निवेशकों को एक ही नाम वाली स्कीमों के बीच भ्रम न हो और वे जो उम्मीद करें, वही उन्हें प्राप्त हो।
वर्ष 2017 से पहले, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMC) अपनी योजनाओं को अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी नाम दे देती थीं, जिससे बाजार में काफी अस्पष्टता थी। SEBI ने हस्तक्षेप करते हुए सभी म्यूचुअल फंड स्कीमों को इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, सॉल्यूशन ओरिएंटेड और अन्य श्रेणियों में व्यवस्थित किया। अब प्रत्येक AMC को अपनी एक विशिष्ट कैटेगरी में केवल एक ही स्कीम रखने की अनुमति है, सिवाय कुछ विशिष्ट मामलों के जैसे इंडेक्स फंड या सेक्टर फंड।
एक MFD के नाते, जब आप किसी निवेशक को ‘लार्ज-कैप फंड’ सुझाते हैं, तो आप सुनिश्चित होते हैं कि फंड के पोर्टफोलियो का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा केवल शीर्ष 100 कंपनियों में ही होगा। यह नियम निवेशकों को उस ‘स्टाइल ड्रिफ्ट’ से बचाता है जहाँ फंड मैनेजर रिटर्न बढ़ाने के लिए छोटी कंपनियों में दांव लगाने लगता है।
इस वर्गीकरण का व्यावहारिक लाभ यह है कि यह तुलना को ‘सेब की तुलना सेब से’ (apples to apples) बनाता है। जब आप एक निवेशक के पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हैं, तो आप यह जांच सकते हैं कि क्या उनके पास केवल एक ही श्रेणी के फंडों की अधिकता है।
यदि कोई निवेशक जोखिम कम करना चाहता है, तो उसे यह समझाना आसान हो जाता है कि क्यों उसके पास तीन अलग-अलग लार्ज-कैप फंड होने के बजाय एक लार्ज-कैप और एक मिड-कैप फंड का संयोजन बेहतर है। अंततः, यह वर्गीकरण केवल एक विनियामक अनुपालन नहीं है, बल्कि यह वह नींव है जिस पर आप निवेशक के साथ विश्वास का निर्माण करते हैं, यह जानते हुए कि आपने उन्हें एक पारदर्शी और सुव्यवस्थित निवेश मार्ग दिखाया है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में, आप अपने निवेशक को सेबी के स्कीम वर्गीकरण नियमों का क्या लाभ बताएंगे?
यदि कोई फंड मैनेजर अपने ‘लार्ज-कैप फंड’ में 40 प्रतिशत निवेश मिड-कैप शेयरों में करने का निर्णय लेता है, तो यह किस नियम का उल्लंघन हो सकता है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘12.4 — विभिन्न AMCs द्वारा या स्कीम संवर्ग के भीतर ऑफर की गई म्यूचुअल फ़ंड स्कीम का चयन’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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