म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं कठिनाई स्तर: शुरुआती (Beginner) पढ़ने का समय: 2 मिनट
📌 Chapter 12.3 — म्यूचुअल फ़ंड की निवेश रणनीति पर आधारित स्कीम का चयन

एक निवेशक आपके पास आकर पूछता है कि जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट बढ़ाता है, तो उसके डेट पोर्टफोलियो पर नकारात्मक असर क्यों पड़ता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसका सामना प्रत्येक MFD को अपने करियर में बार-बार करना पड़ता है। जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना हो, तब पारंपरिक फिक्स्ड रेट बॉन्ड्स की कीमतें गिरती हैं, जिससे NAV प्रभावित होता है। यहाँ फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स की कार्यप्रणाली एक सुरक्षा कवच के रूप में सामने आती है।

ये बॉन्ड्स निश्चित कूपन दर के बजाय एक वेरिएबल दर पर ब्याज का भुगतान करते हैं, जो एक बेंचमार्क (जैसे MIBOR) से जुड़ी होती है।

फ्लोटिंग रेट फंड्स की मुख्य विशेषता यह है कि इनका कूपन समय के साथ बाजार की ब्याज दरों के अनुरूप बदलता रहता है। जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इन बॉन्ड्स का कूपन भुगतान भी बढ़ जाता है। इसके विपरीत, फिक्स्ड रेट बॉन्ड्स में निवेशक ब्याज दरों के बढ़ने पर फंसा हुआ महसूस करता है क्योंकि उसका रिटर्न पुराने कम दरों पर स्थिर रहता है।

एक MFD के रूप में, यह समझना आवश्यक है कि फ्लोटिंग रेट फंड्स का उपयोग पोर्टफोलियो में ड्यूरेशन रिस्क (duration risk) को कम करने के लिए किया जाता है। यह फंड मैनेजर को ब्याज दर के चक्रों के प्रति अधिक संवेदनशील और लचीला बनाता है।

कल्पना कीजिए कि आपके पास एक ऐसा निवेशक है जो अल्पकालिक निवेश की तलाश में है लेकिन ब्याज दरों में अस्थिरता को लेकर चिंतित है। उसे ऐसे फंड्स की ओर निर्देशित करना जहाँ फंड मैनेजर सक्रिय रूप से फ्लोटिंग रेट इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग कर रहा है, एक विवेकपूर्ण निर्णय है। यदि आप इसे सही ढंग से नहीं समझाते हैं, तो निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव को समझ नहीं पाएगा और गलत समय पर अपना निवेश निकाल लेगा।

निवेश चयन में तकनीक और बाजार के रुझान का यह तालमेल ही एक पेशेवर MFD की पहचान है। अंततः, फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स का उद्देश्य केवल रिटर्न को अधिकतम करना नहीं, बल्कि ब्याज दर के जोखिम को संतुलित करते हुए पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करना है।


💡सूक्ष्म बिंदु

⚠️ Nuance
परीक्षार्थी अक्सर यह गलती करते हैं कि वे फ्लोटिंग रेट फंड्स को जोखिम-मुक्त मान लेते हैं। हालांकि ये ब्याज दर के जोखिम को कम करते हैं, फिर भी इनमें क्रेडिट रिस्क (credit risk) और लिक्विडिटी रिस्क हमेशा मौजूद रहता है। MFD को यह याद रखना चाहिए कि बेंचमार्क के साथ कूपन का समायोजन होता है, लेकिन अंतर्निहित प्रतिभूतियों (underlying securities) की साख में कमी आने पर NAV पर असर पड़ सकता है, जिसे केवल ब्याज दर की सुरक्षा से नहीं रोका जा सकता।

🧠 ज्ञान परखें

Practice Question 1

फ्लोटिंग रेट फंड्स के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?

Practice Question 2

यदि किसी MFD को यह अपेक्षा है कि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ेंगी, तो निवेशक के पोर्टफोलियो के लिए कौन सी श्रेणी अधिक उपयुक्त होगी?


यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘12.3 — म्यूचुअल फ़ंड की निवेश रणनीति पर आधारित स्कीम का चयन’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।

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