एक निवेशक के पास जब आप बैठते हैं और वह क्लोज-एंडेड फंड में निवेश की इच्छा जताता है, तो सबसे बड़ा प्रश्न यही होता है कि यदि भविष्य में उसे अचानक पैसों की आवश्यकता हुई तो क्या होगा। क्लोज-एंडेड फंड में चूंकि लॉक-इन अवधि होती है, इसलिए ये फंड ओपन-एंडेड फंड की तरह रिडेम्पशन की सुविधा नहीं देते। हालांकि, सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, ऐसे फंड्स को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध (list) होना अनिवार्य है।
यहीं से एक MFD के रूप में आपकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि आपको निवेशक को यह समझाना होता है कि एक्सचेंज पर बिकवाली का अर्थ सीधे फंड हाउस से पैसा निकालना नहीं है।
स्टॉक एक्सचेंज पर क्लोज-एंडेड फंड के यूनिट्स की खरीद-फरोख्त बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर होती है। इस प्रक्रिया में, यूनिट्स की ट्रेडिंग अक्सर उनकी शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) से कम कीमत पर होती है, जिसे हम एनएवी पर डिस्काउंट कहते हैं। यह डिस्काउंट इस बात का प्रतीक है कि बाजार तरलता के लिए एक प्रीमियम मांग रहा है।
एक MFD के तौर पर, आपका काम निवेशक को आगाह करना है कि यदि उन्हें मैच्योरिटी से पहले अपने फंड्स को बेचना पड़ा, तो उन्हें एनएवी (NAV) से कम कीमत मिल सकती है, जिससे उनका वास्तविक लाभ प्रभावित हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि किसी क्लोज-एंडेड फंड की एनएवी (NAV) 12 रुपये है, लेकिन एक्सचेंज पर खरीदार की कमी के कारण वह केवल 11.20 रुपये में ट्रेड कर रहा है। यदि निवेशक को उस समय धन की आवश्यकता है, तो उसे 80 पैसे प्रति यूनिट का नुकसान उठाकर उसे बेचना होगा। यह बाजार की अस्थिरता और लिक्विडिटी रिस्क का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है।
आपको निवेशक को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्लोज-एंडेड फंड केवल तभी चुने जाने चाहिए जब निवेशक का लक्ष्य और समय सीमा उस फंड की मैच्योरिटी के साथ पूरी तरह मेल खाती हो।
अनुभव यह सिखाता है कि जो MFD निवेशक की लिक्विडिटी जरूरतों का सही आकलन नहीं कर पाते, वे अंततः क्लाइंट का भरोसा खो देते हैं। बाजार की तरलता हर समय एक समान नहीं होती, और एक्सचेंज पर वॉल्यूम की कमी कभी-कभी भारी डिस्काउंट का कारण बनती है। एक पेशेवर दृष्टिकोण यह है कि क्लोज-एंडेड फंड्स को एक ‘होल्ड-टू-मैच्योरिटी’ उत्पाद के रूप में देखें, न कि किसी ऐसे साधन के रूप में जहाँ से आवश्यकता पड़ने पर आसानी से पैसा निकाला जा सके।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक निवेशक ने 3 वर्ष की अवधि वाले क्लोज-एंडेड फंड में निवेश किया है, लेकिन 1 वर्ष बाद ही उसे अपने निवेश को निकालने की आवश्यकता है। एक MFD के रूप में आप उसे क्या सुझाव देंगे?
यदि किसी क्लोज-एंडेड फंड के यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी एनएवी (NAV) से कम मूल्य पर ट्रेड कर रहे हैं, तो यह क्या दर्शाता है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘12.3 — म्यूचुअल फ़ंड की निवेश रणनीति पर आधारित स्कीम का चयन’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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