म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं कठिनाई स्तर: शुरुआती (Beginner) पढ़ने का समय: 2 मिनट
📌 Chapter 11.6 — अन्य स्कीमों के लिए बेंचमार्क

एक निवेशक जब आपसे यह पूछता है कि उसे इंडेक्स फंड चुनना चाहिए या किसी सक्रिय रूप से प्रबंधित फंड में निवेश करना चाहिए, तो वह वास्तव में यह पूछ रहा होता है कि क्या फंड मैनेजर का अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता बाजार को पछाड़ने में सक्षम है। एक MFD के रूप में, यह स्थिति केवल एक उत्पाद चुनने की नहीं, बल्कि निवेश दर्शन को समझने की है।

निष्क्रिय निवेश (Passive Investing) रणनीति का उद्देश्य किसी विशिष्ट बाजार सूचकांक (Index) के प्रदर्शन की नकल करना होता है, जहाँ पोर्टफोलियो की संरचना सूचकांक के घटकों के समान रखी जाती है। इसके विपरीत, सक्रिय निवेश (Active Investing) में फंड मैनेजर अपनी शोध क्षमता और बाजार विश्लेषण के आधार पर शेयरों का चयन करता है, जिसका उद्देश्य बेंचमार्क से बेहतर लाभ कमाना होता है।

सक्रिय निवेश की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए, हमें ‘अल्फा’ (Alpha) की अवधारणा को समझना आवश्यक है। यदि एक सक्रिय फंड अपने बेंचमार्क से लगातार अधिक लाभ देता है, तो वह मूल्य सृजन कर रहा है, जो अक्सर बाजार की उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों में निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।

हालांकि, यह भी सच है कि सक्रिय फंड का व्यय अनुपात (TER) निष्क्रिय फंड की तुलना में अधिक होता है क्योंकि इसमें फंड प्रबंधन की लागत शामिल होती है। एक MFD के नाते, आपकी भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि क्या निवेशक का लक्ष्य कम लागत वाले निवेश से संतुष्ट होना है या वह बाजार से बेहतर प्रदर्शन (आउटपरफॉर्मेंस) पाने के लिए थोड़ा अधिक शुल्क देने को तैयार है।

उदाहरण के तौर पर, यदि आप एक ऐसे निवेशक को देख रहे हैं जो निफ्टी 50 की स्थिरता चाहता है, तो उसे कम व्यय अनुपात वाले इंडेक्स फंड का सुझाव देना व्यावहारिक हो सकता है। परंतु, यदि निवेशक का लक्ष्य ऐसी श्रेणियों में निवेश करना है जहाँ बाजार में सूचनाओं की कमी होती है, जैसे कि मिड-कैप या स्मॉल-कैप फंड, तो वहां सक्रिय निवेश का महत्व बढ़ जाता है।

इन क्षेत्रों में एक कुशल फंड मैनेजर का स्टॉक चयन बहुत बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। याद रखें, निष्क्रिय निवेश बाजार के साथ चलने का मार्ग है, जबकि सक्रिय निवेश बाजार को मात देने का एक सचेत प्रयास है। एक सफल वितरक वह है जो निवेशक की जोखिम क्षमता और अपेक्षाओं के साथ इन दोनों रणनीतियों का सही संतुलन बैठा सके।


💡सूक्ष्म बिंदु

⚠️ Nuance
परीक्षार्थी अक्सर यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि सक्रिय निवेश हमेशा निष्क्रिय निवेश से बेहतर होता है क्योंकि इसमें ‘बीटिंग द मार्केट’ का लक्ष्य होता है। वास्तविकता यह है कि दोनों की अपनी उपयोगिता है और चयन पूरी तरह से बाजार दक्षता (Market Efficiency) पर निर्भर करता है। एक पेशेवर MFD को यह समझना चाहिए कि सक्रिय फंडों में भी कभी-कभी फंड मैनेजर का प्रदर्शन लंबे समय तक बेंचमार्क से पीछे रह सकता है, और यह ‘अंडरपरफॉर्मेंस’ निवेश की रणनीति का एक हिस्सा हो सकती है। इसे महज एक असफलता मानकर निवेशक को फंड से बाहर निकालने की सलाह देना एक सामान्य त्रुटि है, जिससे बचना चाहिए।

🧠 ज्ञान परखें

Practice Question 1

एक म्यूचुअल फंड वितरक के रूप में, आप एक ऐसी स्कीम का चयन करना चाहते हैं जो निवेश पोर्टफोलियो को सक्रिय रूप से प्रबंधित करती है। सक्रिय निवेश रणनीति की मुख्य विशेषता क्या है?

Practice Question 2

निष्क्रिय निवेश (Passive Investment) की तुलना में सक्रिय निवेश (Active Investment) का मूल्यांकन करते समय, एक MFD को किस बिंदु पर विशेष ध्यान देना चाहिए?


यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘11.6 — अन्य स्कीमों के लिए बेंचमार्क’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।

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