एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) के रूप में, अक्सर आपका सामना ऐसे निवेशकों से होता है जो बैंक एफडी (Fixed Deposit) के सुरक्षित विकल्प तलाशते हुए डेब्ट फंड में आते हैं और अपेक्षा करते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित भी रहे और प्रतिलाभ भी अधिक मिले। जब बाजार में ब्याज दरों का चक्र बदलता है, तो ऐसे निवेशकों के पोर्टफोलियो की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अचानक गिरावट उन्हें विचलित कर देती है।
यह वह क्षण है जहाँ एक कुशल MFD को उन्हें समझाना होता है कि डेब्ट फंड केवल एक सुरक्षित तिजोरी नहीं, बल्कि बाजार की ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील एक वित्तीय उपकरण है। ब्याज दरें और बॉन्ड की कीमतें विपरीत दिशा में चलती हैं। जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ती हैं, पुराने बॉन्ड, जो कम कूपन दर प्रदान कर रहे हैं, बाजार में अपनी आकर्षण शक्ति खो देते हैं और उनकी कीमतों में गिरावट आती है।
यहाँ ‘मैच्योरिटी’ या ‘ड्यूरेशन’ का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण हथियार बन जाता है। यदि आपका निवेशक अगले एक या दो वर्षों में अपने बच्चों की शिक्षा या किसी अल्पकालिक लक्ष्य के लिए धन की निकासी करना चाहता है, तो उसे लंबी अवधि के गिल्ट फंड (Gilt Fund) या लंबी मैच्योरिटी वाले बॉन्ड फंड में निवेश कराना एक गंभीर भूल हो सकती है।
इन फंडों का पोर्टफोलियो ड्यूरेशन लंबा होता है, जिसका अर्थ है कि ब्याज दरों में मामूली वृद्धि भी इनके एनएवी (NAV) पर गहरा असर डाल सकती है। इसके विपरीत, कम अवधि के फंड या लिक्विड फंड (Liquid Fund) में मैच्योरिटी कम होती है, जिससे वे ब्याज दरों में होने वाली हलचल के प्रति अधिक स्थिर रहते हैं।
एक MFD के नाते आपका कार्य केवल निवेश की बिक्री करना नहीं, बल्कि निवेशक की समय सीमा (Time Horizon) को फंड के पोर्टफोलियो मैच्योरिटी के साथ संरेखित करना है। यदि आप किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति को उसकी पूंजी की सुरक्षा के लिए लंबे ड्यूरेशन का फंड सुझाते हैं, तो आप उसे अनावश्यक बाजार जोखिम में धकेल रहे हैं।
ब्याज दर जोखिम को कम करने की सबसे प्रभावी रणनीति यही है कि फंड की ‘मॉडिफाइड ड्यूरेशन’ और निवेशक की निवेश अवधि का मिलान किया जाए। जब पोर्टफोलियो की मैच्योरिटी निवेशक की जरूरत के साथ तालमेल बिठाती है, तो बाजार की अस्थिरता का प्रभाव न्यूनतम हो जाता है और निवेश का उद्देश्य सुरक्षित रहता है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक निवेशक अगले 18 महीनों में घर खरीदने के लिए धन का उपयोग करना चाहता है। ब्याज दर जोखिम को कम करने और निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे किस प्रकार के डेब्ट फंड का चयन करना चाहिए?
यदि किसी डेब्ट फंड का मॉडिफाइड ड्यूरेशन अधिक है, तो ब्याज दरों में 1% की वृद्धि होने पर फंड पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘10.8 — क्रेडिट जोखिम के संबंध में कुछ प्रावधान’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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