एक निवेशक जब आपसे यह पूछता है कि क्या उसके फंड का डेरिवेटिव्स (Derivatives) में निवेश पूरी तरह सुरक्षित है, तो अक्सर एक MFD का ध्यान केवल रिटर्न या हेजिंग (Hedging) की दक्षता पर चला जाता है। वास्तविकता यह है कि डेरिवेटिव्स सौदे केवल बाजार की चाल पर निर्भर नहीं होते, बल्कि वे उस अनुबंध की दूसरी पार्टी की वित्तीय स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।
यदि कोई फंड हाउस डेरिवेटिव्स का उपयोग कर रहा है, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि सामने वाली पार्टी, जिसके साथ यह समझौता किया गया है, समय पर अपनी देनदारी चुकाने में सक्षम होगी। इसे ही काउंटर पार्टी जोखिम (Counterparty Risk) कहा जाता है, जो किसी भी वित्तीय अनुबंध का एक अंतर्निहित पहलू है।
भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में, डेरिवेटिव्स का उपयोग जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है, न कि केवल सट्टेबाजी के लिए। हालांकि, जब एक फंड मैनेजर पोर्टफोलियो को हेज करने के लिए स्वैप (Swap) या फॉरवर्ड अनुबंधों का सहारा लेता है, तो वह एक तकनीकी क्रेडिट जोखिम भी ले रहा होता है।
यदि काउंटर पार्टी, जो आमतौर पर एक बैंक या वित्तीय संस्थान होती है, अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहती है, तो फंड का प्रदर्शन और उसकी शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) सीधे प्रभावित हो सकती है। एक MFD के रूप में, यह आपका कर्तव्य है कि आप निवेशक को यह समझाएं कि फंड मैनेजर केवल अपनी रणनीति नहीं बनाते, बल्कि वे इन अनुबंधों में शामिल संस्थानों की साख (Creditworthiness) की भी निरंतर समीक्षा करते हैं।
इस जोखिम को समझने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसे एक दोतरफा अनुबंध के रूप में देखा जाए। मान लीजिए कि एक इक्विटी फंड ने गिरावट से बचने के लिए इंडेक्स फ्यूचर्स का उपयोग किया है। यदि उस सौदे के विपरीत खड़ी संस्था दिवालिया हो जाती है या डिफॉल्ट करती है, तो फंड को मिलने वाला लाभ या सुरक्षा कवर संकट में पड़ सकता है।
एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव्स में जोखिम कम होता है क्योंकि वहां समाशोधन निगम (Clearing Corporation) गारंटी देता है, लेकिन ओटीसी (OTC) डेरिवेटिव्स के मामले में यह जोखिम कहीं अधिक स्पष्ट हो जाता है। आपका काम निवेशक को इस बारीकी से अवगत कराना है ताकि वे उन पोर्टफोलियो की गहराई को समझ सकें जिन्हें वे केवल एक नंबर के रूप में देख रहे होते हैं।
अक्सर यह माना जाता है कि म्यूचुअल फंड में निवेश का मतलब केवल बाजार जोखिम है, लेकिन डेरिवेटिव्स की जटिल दुनिया में काउंटर पार्टी का चुनाव भी फंड की सुरक्षा तय करता है। जब आप किसी निवेशक को ऐसे फंड सुझाते हैं जो सक्रिय रूप से डेरिवेटिव्स का उपयोग करते हैं, तो हमेशा फंड के पोर्टफोलियो डिस्क्लोजर को देखें।
एक कुशल MFD वही है जो बाजार की अस्थिरता के साथ-साथ उन सूक्ष्म संस्थागत जोखिमों को भी समझता है जो पर्दे के पीछे काम करते हैं। जोखिम प्रबंधन केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता को परखने का नाम है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक म्यूचुअल फंड स्कीम डेरिवेटिव अनुबंधों के माध्यम से अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को हेज कर रही है। काउंटर पार्टी जोखिम (Counterparty Risk) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव्स की तुलना में ओवर-द-काउंटर (OTC) डेरिवेटिव्स में काउंटर पार्टी जोखिम अधिक क्यों माना जाता है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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