एक MFD के रूप में, अक्सर आपके पास ऐसे निवेशक आते हैं जो बाजार में गिरावट के समय घबराकर अपना पूरा पोर्टफोलियो बेचने की बात करते हैं। मान लीजिए आपका एक निवेशक कहता है कि वह इक्विटी में बना रहना चाहता है, लेकिन बाजार की अस्थिरता (volatility) से वह रात भर सो नहीं पा रहा है।
ऐसे में फंड मैनेजर केवल नकदी (cash) का सहारा नहीं लेते, बल्कि इंडेक्स फ्यूचर्स जैसे डेरिवेटिव उपकरणों का उपयोग करके पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखते हैं। इंडेक्स फ्यूचर्स का प्रबंधन एक ऐसी कला है जिसे समझना हर MFD के लिए अनिवार्य है ताकि वे निवेशक को यह भरोसा दिला सकें कि फंड हाउस उनके पैसे को बाजार के जोखिमों से बचाने के लिए किस स्तर पर काम कर रहा है।
इंडेक्स फ्यूचर्स में निवेश का मुख्य उद्देश्य हेजिंग (hedging) करना होता है। जब फंड मैनेजर को लगता है कि निकट भविष्य में बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती है, तो वे सीधे शेयरों को बेचने के बजाय इंडेक्स फ्यूचर्स को शॉर्ट (short) कर देते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि फंड हाउस को पोर्टफोलियो के शेयरों को बेचने की तात्कालिक आवश्यकता नहीं होती, जिससे लेन-देन लागत (transaction cost) बचती है और तरलता (liquidity) भी बनी रहती है।
यह एक प्रकार का बीमा (insurance) है, जो पोर्टफोलियो के शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) को बाजार के बड़े झटकों से बचाने का प्रयास करता है।
एक MFD के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इंडेक्स फ्यूचर्स का सही प्रबंधन फंड मैनेजर की चतुराई को दर्शाता है। यदि एक फंड मैनेजर इंडेक्स फ्यूचर्स का गलत तरीके से उपयोग करता है, तो यह निवेश के उद्देश्यों को बिगाड़ सकता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (Balanced Advantage Fund) में फ्यूचर्स का सही उपयोग नहीं किया गया, तो फंड के रिटर्न बेंचमार्क से काफी अलग हो सकते हैं, जिससे निवेशक का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। आपको निवेशक को यह समझाना चाहिए कि इंडेक्स फ्यूचर्स केवल सट्टेबाजी का साधन नहीं हैं, बल्कि ये पोर्टफोलियो की अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए एक कुशल उपकरण हैं।
अंत में, इंडेक्स फ्यूचर्स के प्रबंधन की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि निवेशक के पोर्टफोलियो का बीटा (beta) बाजार की स्थितियों के अनुकूल बना रहे। एक योग्य MFD वही है जो रिटर्न के पीछे के इन जटिल प्रबंधन निर्णयों को सरल भाषा में समझा सके। जोखिम प्रबंधन का अर्थ केवल जोखिम से बचना नहीं, बल्कि उसे समझदारी से व्यवस्थित करना है ताकि निवेशक दीर्घकालिक संपत्ति सृजन के पथ पर अडिग रह सके।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक म्यूचुअल फंड स्कीम में इंडेक्स फ्यूचर्स के प्रबंधन का प्राथमिक उद्देश्य क्या होता है?
जब एक फंड मैनेजर इंडेक्स फ्यूचर्स को ‘शॉर्ट’ करता है, तो इसका पोर्टफोलियो पर क्या प्रभाव पड़ता है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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