म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं कठिनाई स्तर: शुरुआती (Beginner) पढ़ने का समय: 2 मिनट
📌 Chapter 10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक

एक निवेशक के पास जब आप बैठते हैं, तो वह अक्सर फ्लोटिंग रेट फंड्स को ब्याज दरों के बदलाव से सुरक्षित मान लेता है। यह धारणा तब दम तोड़ देती है जब वह देखता है कि फंड का रिटर्न अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, भले ही आरबीआई (RBI) ने रेपो दरें बढ़ा दी हों।

एक MFD के रूप में, आपकी चुनौती निवेशक को यह समझाना है कि फ्लोटिंग रेट सिक्योरिटीज केवल ब्याज दर के जोखिम से मुक्त नहीं हैं, बल्कि वे ‘आधार जोखिम’ (Basis Risk) जैसे अदृश्य कारकों के अधीन भी हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब फंड के पोर्टफोलियो में मौजूद सिक्योरिटीज का बेंचमार्क और जिस आधार पर कूपन दर रीसेट की जाती है, उनके बीच असंतुलन होता है।

कल्पना कीजिए कि एक फ्लोटिंग रेट फंड ने ऐसी कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश किया है जो मुंबई इंटरबैंक ऑफर रेट (MIBOR) से जुड़े हैं, जबकि बाजार में प्रचलित सरकारी प्रतिभूतियों की दरें अलग गति से बदल रही हैं। जब इन दो बेंचमार्क दरों में विचलन (Spread) बढ़ता है या घटता है, तो फंड की शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यह अंतर ही आधार जोखिम कहलाता है।

यदि एक MFD यह मानकर चलता है कि फ्लोटिंग रेट फंड में ब्याज दर का जोखिम शून्य है, तो वह निवेशक के जोखिम प्रोफाइल को गलत तरीके से आंकेगा और एक ऐसी उत्पाद श्रेणी में उन्हें शामिल कर देगा जो उनके लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है।

व्यावहारिक तौर पर, फंड मैनेजर का काम इस आधार जोखिम को सीमित करने के लिए विभिन्न बेंचमार्क वाली प्रतिभूतियों के मिश्रण को कुशलतापूर्वक संतुलित करना होता है। एक MFD को यह समझना चाहिए कि जब भी क्रेडिट स्प्रेड या बेंचमार्क इंडेक्स में अस्थिरता आती है, तो फ्लोटिंग रेट फंड्स का प्रदर्शन सामान्य बॉन्ड फंड्स से भिन्न व्यवहार करेगा। पोर्टफोलियो निर्माण करते समय, फंड का ‘ड्यू डिलिजेंस’ करते समय इस बात पर गौर करना आवश्यक है कि फंड मैनेजर बेंचमार्क के चयन में कितनी सावधानी बरत रहा है।

अंततः, सफलता इस बात में निहित है कि आप निवेशक को केवल रिटर्न के आंकड़ों से नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो के भीतर छिपे संरचनात्मक जोखिमों से परिचित कराएं। फ्लोटिंग रेट फंड्स एक उत्कृष्ट निवेश उपकरण हो सकते हैं, बशर्ते उन्हें एक स्थिर परिसंपत्ति मानने की भूल न की जाए।

जोखिम को नियंत्रित करने के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि ब्याज दरें बदल रही हैं, यह जानना भी आवश्यक है कि जिस बेंचमार्क से आपकी प्रतिभूति जुड़ी है, वह बाजार के संकेतों के साथ कितनी ईमानदारी से तालमेल बिठा पा रही है।


💡सूक्ष्म बिंदु

⚠️ Nuance
परीक्षार्थी अक्सर फ्लोटिंग रेट फंड में आधार जोखिम और क्रेडिट जोखिम को एक ही मान लेते हैं, जबकि यह एक गंभीर त्रुटि है। आधार जोखिम मूलतः बेंचमार्क के ‘मिसमैच’ (Mismatch) का मामला है, न कि डिफॉल्ट का। एक चतुर MFD को यह याद रखना चाहिए कि बेंचमार्क के बीच का यह अंतर किसी भी समय अनपेक्षित रूप से बढ़ सकता है, जिससे फंड के रिटर्न में अस्थिरता आती है और इसे केवल ब्याज दर की सुरक्षा के चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

🧠 ज्ञान परखें

Practice Question 1

एक फ्लोटिंग रेट फंड में आधार जोखिम (Basis Risk) मुख्य रूप से किस स्थिति में उत्पन्न होता है?

Practice Question 2

यदि कोई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड MIBOR से जुड़ा है और अचानक बाजार में अन्य अल्पकालिक दरों में अप्रत्याशित बदलाव आता है, तो एक MFD को पोर्टफोलियो जोखिम का आकलन कैसे करना चाहिए?


यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।

कॉपीराइट (स्वत्वाधिकार) © २०२६ `अखिलेश गुरुरानी. सर्वाधिकार सुरक्षित.