एक निवेशक आपके पास आकर पूछता है कि उसका डेट फंड सुरक्षित है, लेकिन अचानक समाचार में आता है कि किसी बड़ी कंपनी ने अपने बॉन्ड पर ब्याज का भुगतान करने में असमर्थता जताई है। यह वह क्षण है जहाँ एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) के रूप में आपकी भूमिका परीक्षा के कागजों से निकलकर वास्तविक जीवन के प्रबंधन में बदल जाती है।
क्रेडिट जोखिम का अर्थ है वह संभावना कि ऋण लेने वाली इकाई, जैसे कि कोई कॉर्पोरेट या सरकारी संस्था, अपना मूलधन या ब्याज समय पर चुकाने में विफल रहेगी। यह जोखिम विशेष रूप से उन फंडों में अधिक होता है जो निम्न रेटिंग वाले पेपर में निवेश करते हैं ताकि उच्च लाभ (yield) प्राप्त किया जा सके।
डिफॉल्ट की स्थिति में फंड का शुद्ध एसेट वैल्यू (NAV) तेजी से गिरता है क्योंकि उस विशेष सिक्योरिटी को पोर्टफोलियो से राइट-ऑफ करना पड़ता है या उसका मूल्य शून्य करना पड़ता है। एक MFD के रूप में, आपका काम निवेशक को यह समझाना है कि क्रेडिट रिसर्च और ड्यू डिलिजेंस का अर्थ केवल पिछली परफॉरमेंस देखना नहीं, बल्कि यह परखना है कि क्या फंड मैनेजर ने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखी है।
यदि किसी फंड का एक बड़ा हिस्सा एक ही क्षेत्र या कम क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों में फंसा है, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। अच्छे फंड मैनेजर अक्सर क्रेडिट स्प्रेड पर नजर रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि पोर्टफोलियो में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहे ताकि संकट के समय उन्हें घाटे में एसेट न बेचना पड़े।
उदाहरण के लिए, यदि एक कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा ‘एएए’ (AAA) रेटिंग वाली सरकारी या मजबूत कंपनियों के बजाय ‘ए’ (A) या उससे नीचे की रेटिंग वाली कंपनियों में निवेश किया है, तो निवेशक को संभावित ‘इवेंट रिस्क’ के बारे में पहले से सचेत करना आपका नैतिक कर्तव्य है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि उच्च प्रतिलाभ की चाहत हमेशा उच्च जोखिम के साथ आती है।
एक MFD के तौर पर आपका दृष्टिकोण हमेशा सुरक्षा और उपयुक्तता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि केवल पिछले एक वर्ष के प्रदर्शन पर। अंततः, निवेशक का विश्वास उस जानकारी पर आधारित होता है जो आप उसे बाजार के उन अदृश्य खतरों के बारे में देते हैं जो पहली नजर में नहीं दिखाई देते।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक म्यूचुअल फंड स्कीम में सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो (Side Pocketing) बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
यदि किसी डेट फंड का फंड मैनेजर ‘क्रेडिट रिस्क’ को कम करने के लिए ‘पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन’ का उपयोग कर रहा है, तो इसका सबसे सही व्यावहारिक अर्थ क्या होगा?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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