म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं कठिनाई स्तर: शुरुआती (Beginner) पढ़ने का समय: 2 मिनट
📌 Chapter 10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक

एक निवेशक आपसे पूछता है कि क्या उसके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के शेयर भी किसी प्रकार की कमाई कर सकते हैं, जबकि वे पोर्टफोलियो में निष्क्रिय पड़े हैं। यह प्रश्न म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह उन्हें सिक्योरिटीज लेंडिंग (Securities Lending and Borrowing - SLB) की प्रक्रिया के बारे में समझा सके।

कई निवेशकों को लगता है कि फंड मैनेजर का काम केवल शेयर खरीदना और बेचना है, जबकि कुशल फंड प्रबंधन में पोर्टफोलियो की निष्क्रिय पड़ी संपत्तियों को अतिरिक्त आय (Yield) में बदलने की कला भी शामिल है।

सिक्योरिटीज लेंडिंग के तहत, म्यूचुअल फंड अपनी होल्डिंग में मौजूद शेयरों को किसी अन्य संस्था को एक निश्चित अवधि के लिए उधार देते हैं, जिसके बदले में उन्हें शुल्क (Fee) प्राप्त होता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से SEBI के दिशानिर्देशों के अधीन है, जहाँ उधार लेने वाली संस्था को अनिवार्य रूप से कोलेटरल (Collateral) जमा करना पड़ता है।

एक MFD के रूप में, आपको यह समझना चाहिए कि यह गतिविधि पोर्टफोलियो के कुल रिटर्न में छोटा ही सही, लेकिन एक सकारात्मक योगदान देती है, विशेषकर उन फंड्स में जहाँ लंबी अवधि के लिए होल्डिंग्स को रखा जाता है।

जब एक फंड मैनेजर सिक्योरिटीज लेंडिंग का चुनाव करता है, तो उनका मुख्य ध्यान इस बात पर होता है कि कोलेटरल की गुणवत्ता क्या है और क्या यह फंड की तरलता (Liquidity) को प्रभावित करेगा। यदि कोलेटरल के रूप में केवल सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities) या उच्च गुणवत्ता वाले नकद समकक्ष लिए जाते हैं, तो जोखिम न्यूनतम रहता है। पोर्टफोलियो में यह पारदर्शिता बनाए रखना ही फंड हाउस की ड्यू डिलिजेन्स (Due Diligence) को दर्शाता है।

इस प्रक्रिया को समझने का महत्व इसलिए है क्योंकि यह फंड के व्यय अनुपात (TER) को कुछ हद तक संतुलित करने में सहायक हो सकता है। निवेशक को यह स्पष्ट करना आपकी जिम्मेदारी है कि लेंडिंग केवल तभी की जाती है जब उससे फंड की सुरक्षा और तरलता से समझौता न हो। एक जानकार MFD वही है जो यह जान सके कि किस फंड हाउस ने अपनी लेंडिंग नीतियों में कितना संयम रखा है।

अंततः, सिक्योरिटीज लेंडिंग केवल अतिरिक्त आय का जरिया नहीं, बल्कि फंड मैनेजर की जोखिम प्रबंधन की क्षमता का एक सूक्ष्म परीक्षण है।


💡सूक्ष्म बिंदु

⚠️ Nuance
परीक्षार्थी अक्सर यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि सिक्योरिटीज लेंडिंग का अर्थ शेयरों का पूरी तरह से विक्रय है, जिससे ओनरशिप खत्म हो जाती है। वास्तव में, लेंडिंग के दौरान भी डिविडेंड और कॉर्पोरेट लाभ निवेशक के पास ही रहते हैं, और लेंडर के पास वापस शेयर आने का अधिकार सुरक्षित रहता है। इसे केवल एक अस्थायी किराये के समझौते के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पोर्टफोलियो के विनिवेश के रूप में।

🧠 ज्ञान परखें

Practice Question 1

एक म्यूचुअल फंड स्कीम द्वारा सिक्योरिटीज लेंडिंग का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

Practice Question 2

सिक्योरिटीज लेंडिंग के संदर्भ में कोलेटरल का क्या महत्व है?


यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘10.1 — सामान्य और विशिष्ट जोखिम कारक’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।

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