एक सेवानिवृत्त निवेशक अक्सर आपके कार्यालय में आकर यह कहता है कि उसे केवल ऐसी जगह धन निवेश करना है जहाँ एक रुपये का भी जोखिम न हो। ऐसी स्थिति में, एक MFD के रूप में आपका ध्यान तुरंत भारत सरकार द्वारा जारी की जाने वाली प्रतिभूतियों यानी सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) पर जाता है। इन प्रतिभूतियों को संप्रभु गारंटी (sovereign guarantee) प्राप्त होती है, जिसका अर्थ है कि भारत सरकार इनका मूलधन और ब्याज चुकाने की पूरी जिम्मेदारी लेती है।
यह सुरक्षा इन्हें कॉर्पोरेट बॉन्ड्स या अन्य ऋण लिखतों की तुलना में निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प बनाती है।
हालांकि, निवेश के परिप्रेक्ष्य में ‘सुरक्षा’ का अर्थ केवल डूबने से बचाव नहीं है। जब आप इन प्रतिभूतियों की बात करते हैं, तो आपको निवेशक को यह समझाना होता है कि इनमें ब्याज दर का जोखिम (interest rate risk) सदैव बना रहता है।
यदि बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो पुरानी जारी की गई प्रतिभूतियों का मूल्य गिर जाता है, जिससे यदि निवेशक को समय से पहले अपना पैसा निकालना पड़े, तो उसे बाजार मूल्य पर हानि हो सकती है। एक MFD होने के नाते आपका कार्य निवेशक को यह बताना है कि ‘जोखिम-मुक्त’ का अर्थ केवल ‘डिफ़ॉल्ट न होना’ है, न कि निवेश के मूल्य का स्थिर रहना।
इन प्रतिभूतियों का उपयोग अक्सर बड़े पोर्टफोलियो में एक एंकर के रूप में किया जाता है, विशेष रूप से डेट म्यूचुअल फंड्स के भीतर। जब आप एक हाइब्रिड फंड या गिल्ट फंड (Gilt Fund) का चयन करते हैं, तो आप अनजाने में सरकार की साख पर दांव लगा रहे होते हैं।
एक जागरूक डिस्ट्रीब्यूटर के लिए यह समझना अनिवार्य है कि सरकारी प्रतिभूतियाँ केवल सुरक्षा का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये ब्याज दर की चाल को समझने का एक पैमाना भी हैं। पोर्टफोलियो निर्माण करते समय, केवल यह न देखें कि फंड कितना रिटर्न दे रहा है, बल्कि यह देखें कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किस प्रकार की सरकारी प्रतिभूतियों का उपयोग कर रहा है।
अंत में, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना एक मानसिक संतुलन का खेल है। जो निवेशक शून्य जोखिम की तलाश में है, उसे यह सिखाना आपकी जिम्मेदारी है कि बाजार की हर चाल का असर पोर्टफोलियो पर पड़ता है, चाहे वह कितना भी सुरक्षित क्यों न हो। एक कुशल MFD वह है जो सरकारी प्रतिभूतियों की सुरक्षा को उसकी तरलता और ब्याज दर संवेदनशीलता के साथ सही अनुपात में जोड़कर एक स्थायी निवेश रणनीति तैयार करता है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करना चाहता है क्योंकि उसे डर है कि उसका मूलधन डूब जाएगा। एक MFD के रूप में, आपको उसे किस महत्वपूर्ण तकनीकी जोखिम के बारे में सचेत करना चाहिए?
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) के संदर्भ में सही है?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘1.4 — निवेश जोखिम’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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