एक निवेशक आपके कार्यालय में आता है और गर्व से कहता है कि उसने दस वर्ष पहले सावधि जमाराशि (FD) में एक लाख रुपये निवेश किए थे जो आज बढ़कर डेढ़ लाख रुपये हो गए हैं। पहली दृष्टि में यह लाभ प्रतीत होता है, लेकिन एक सजग म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) के रूप में आपको यह देखना होगा कि आज का वह डेढ़ लाख रुपया वास्तव में कितनी वस्तुओं या सेवाओं को खरीद सकता है।
यदि पिछले एक दशक में औसत मुद्रास्फीति दर 6 प्रतिशत रही है, तो आज के डेढ़ लाख रुपये की क्रय शक्ति वही नहीं है जो दस वर्ष पूर्व के एक लाख रुपये की थी। यहाँ आप केवल एक डिस्ट्रीब्यूटर नहीं, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं जो निवेशक को गणितीय वास्तविकता से परिचित कराता है।
क्रय शक्ति की गणना को समझना इसलिए अनिवार्य है क्योंकि यह निवेश के वास्तविक प्रदर्शन का पैमाना है। जब हम मुद्रास्फीति के विभिन्न स्तरों को निवेश के प्रतिफल (Return) से घटाते हैं, तब हमें वास्तविक प्रतिफल (Real Rate of Return) प्राप्त होता है। यदि कोई निवेशक अपनी बचत को केवल पारंपरिक बैंक उत्पादों में सीमित रखता है, तो वह अनजाने में मुद्रास्फीति के कारण अपनी पूंजी का अवमूल्यन कर रहा है।
एक MFD के नाते आपका कार्य निवेशक को यह समझाना है कि दीर्घकालिक लक्ष्यों, जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा या सेवानिवृत्ति के लिए, केवल नाममात्र के लाभ (Nominal Gain) पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मुद्रास्फीति को मात देने वाली परिसंपत्ति श्रेणियों का चुनाव आवश्यक है।
व्यवहार में, जब आप किसी पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हैं, तो मुद्रास्फीति का प्रभाव यह सुनिश्चित करता है कि आप केवल ‘मुनाफे’ की चर्चा न करें, बल्कि ‘क्रय शक्ति के संरक्षण’ की बात करें। उदाहरण के लिए, यदि आज के 10 लाख के खर्च के लिए 15 वर्ष बाद 25 लाख की आवश्यकता होगी, तो आपका निवेश मॉडल उसी के अनुरूप डिजाइन होना चाहिए।
यदि आप इस बारीक अंतर को निवेशक को नहीं समझा पाते हैं, तो वह भविष्य में अपर्याप्त फंड के कारण निराश हो सकता है। अंततः, एक MFD की सफलता इसी में निहित है कि वह निवेशक को यह सिखा सके कि धन संचय का अर्थ केवल बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्रय शक्ति को जीवित रखना है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक निवेशक ने 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष के नाममात्र ब्याज दर पर निवेश किया है, जबकि उस अवधि के दौरान औसत मुद्रास्फीति दर 5 प्रतिशत रही। निवेशक का अनुमानित ‘वास्तविक प्रतिफल’ (Real Rate of Return) क्या होगा?
यदि मुद्रास्फीति की दर 6 प्रतिशत है, तो आज की 1,00,000 रुपये की क्रय शक्ति एक वर्ष बाद कितनी होगी?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘1.4 — निवेश जोखिम’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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