एक निवेशक आपके पास आकर पूछता है कि उसने सरकारी बॉन्ड में निवेश किया है, लेकिन जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो उसके पोर्टफोलियो का मूल्य कम क्यों हो रहा है। यह एक अत्यंत सामान्य स्थिति है जिसका सामना एक MFD को तब करना पड़ता है जब निवेशक केवल कूपन भुगतान (coupon payment) को आय समझता है और बॉन्ड के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव से अनभिज्ञ रहता है।
बॉन्ड बाजार का यह व्यवहार सीधे तौर पर ‘ब्याज दर जोखिम’ (interest rate risk) से संबंधित है, जिसे समझना एक MFD के लिए पोर्टफोलियो की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अनिवार्य है।
ब्याज दर और बॉन्ड के मूल्य का संबंध व्युत्क्रमानुपाती (inverse) होता है, जिसका अर्थ है कि जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें ऊपर जाती हैं, तो पुराने बॉन्ड, जो कम ब्याज दर पर जारी किए गए थे, बाजार में कम आकर्षक हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, इन बॉन्डों की कीमत सेकेंडरी मार्केट में गिर जाती है।
एक MFD के रूप में, यदि आप अपने निवेशक को यह नहीं समझाते कि पोर्टफोलियो में लंबी परिपक्वता (maturity) वाले बॉन्ड रखने का अर्थ है कि उन्हें ब्याज दर के बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होना पड़ेगा, तो बाजार में उतार-चढ़ाव आने पर वह निवेशक पैनिक में बिकवाली कर सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो दर (repo rate) बढ़ाता है, तो बैंकों द्वारा जमा पर दी जाने वाली दरें भी बढ़ने की संभावना होती है। ऐसी स्थिति में, निवेशकों के लिए नए बॉन्ड, जो उच्च कूपन दर देते हैं, अधिक लुभावने हो जाते हैं।
पुराने बॉन्ड, जो कम दर पर लॉक हो चुके हैं, उनकी मांग गिर जाती है, जिससे निवेशक को पूंजीगत हानि (capital loss) का सामना करना पड़ता है यदि वह उन्हें परिपक्वता से पहले बेचना चाहता है। यह जोखिम विशेष रूप से गिल्ट फंड (gilt funds) और लॉन्ग-ड्यूरेशन डेट फंडों में अधिक स्पष्ट होता है।
निवेशक की आवश्यकता और जोखिम क्षमता के अनुरूप डेट फंडों का चयन करना ही एक कुशल MFD की पहचान है। यदि निवेशक को अल्पकालिक तरलता की आवश्यकता है, तो उसे ड्यूरेशन रिस्क वाले फंडों से दूर रखना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। सफल पोर्टफोलियो निर्माण का मंत्र यह है कि आप निवेशक को यह समझाएं कि डेट निवेश में जोखिम-मुक्त रिटर्न जैसा कुछ नहीं होता, केवल जोखिम का स्वरूप अलग होता है।
बॉन्ड का चयन करते समय केवल कूपन दर न देखें, बल्कि उस फंड के पोर्टफोलियो की औसत मैच्योरिटी को भी ध्यान में रखें।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक निवेशक ने 7% कूपन वाले बॉन्ड खरीदे हैं। यदि बाजार में ब्याज दरें बढ़कर 8.5% हो जाती हैं, तो सेकेंडरी मार्केट में इन बॉन्डों का मूल्य क्या होगा और क्यों?
डेट म्यूचुअल फंड का चयन करते समय ‘ब्याज दर जोखिम’ को कम करने के लिए एक MFD को किस फंड श्रेणी की ओर देखना चाहिए?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘1.3 — विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियाँ (एसेट क्लास)’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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