एक एमएफडी के रूप में, अक्सर आपके पास ऐसे निवेशक आते हैं जो अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से अमेरिकी तकनीकी शेयरों का रुख करना चाहते हैं। जब कोई निवेशक अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड (International Mutual Funds) या फंड ऑफ फंड्स (FoF) में निवेश करता है, तो उनका मुख्य उद्देश्य भौगोलिक विविधीकरण (geographical diversification) होता है। हालांकि, भारतीय कर कानूनों के तहत इन फंडों का कराधान घरेलू इक्विटी फंडों से पूरी तरह भिन्न है।
यदि आप निवेशक को यह स्पष्ट नहीं करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय फंडों पर इंडेक्सेशन लाभ (indexation benefit) के साथ या बिना, किस दर से कर लगेगा, तो आप एक अधूरी वित्तीय योजना दे रहे हैं।
भारत में वित्त अधिनियम 2023 के बाद, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंडों पर मिलने वाले लाभ को ‘अन्य स्रोतों से आय’ (Income from Other Sources) माना जाता है और इसे निवेशक के आयकर स्लैब (income tax slab) के अनुसार कर योग्य बनाया गया है। इसका अर्थ यह है कि दीर्घकालिक निवेश होने के बावजूद, इन फंडों पर कोई विशेष रियायती पूंजीगत लाभ कर (capital gains tax) दर लागू नहीं होती है।
एक एमएफडी के रूप में, यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप निवेशक को समझाएं कि पोर्टफोलियो के रिटर्न की गणना केवल बाजार के उतार-चढ़ाव के आधार पर नहीं, बल्कि कर-पश्चात (post-tax) प्रभाव के आधार पर होनी चाहिए।
एक उदाहरण पर विचार करें जहाँ एक निवेशक ने अपनी कुल बचत का 20 प्रतिशत हिस्सा एक अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी फंड में लगाया है। यदि वह निवेशक 30 प्रतिशत के उच्चतम कर स्लैब में आता है, तो उसकी निवेश पर हुई कमाई का एक बड़ा हिस्सा कर के रूप में चला जाएगा। यदि आपने पहले ही इस कर प्रभाव की चेतावनी नहीं दी है, तो वह निवेशक रिटर्न को लेकर असंतुष्ट हो सकता है।
आपका कार्य केवल फंड चुनना नहीं, बल्कि उस निवेश से जुड़ी कर देयता के बारे में स्पष्ट और पारदर्शी संवाद स्थापित करना है।
निवेशक के लक्ष्यों और उनकी कर स्थिति के बीच सामंजस्य बैठाना ही एक कुशल एमएफडी की पहचान है। अंतरराष्ट्रीय निवेश को केवल एक ‘फैशन’ न बनने दें, बल्कि इसे एक ऐसी रणनीति के रूप में प्रस्तुत करें जहाँ कर के बाद का शुद्ध लाभ निवेशक की जोखिम क्षमता के अनुरूप हो। याद रखें, कर नियोजन (tax planning) निवेश का एक अभिन्न अंग है, और इसे नजरअंदाज करना अंततः निवेशक के पोर्टफोलियो की वास्तविक वृद्धि को सीमित करता है।
💡सूक्ष्म बिंदु
🧠 ज्ञान परखें
एक भारतीय निवेशक ने अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड (फंड ऑफ फंड्स) में निवेश किया है। वित्त अधिनियम 2023 के नवीनतम प्रावधानों के अनुसार, इस निवेश पर होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर कैसे लगेगा?
यदि कोई एमएफडी किसी निवेशक को अंतरराष्ट्रीय फंड सुझाते समय केवल ऐतिहासिक रिटर्न पर ध्यान केंद्रित करता है और कर प्रभाव को छोड़ देता है, तो इसका सबसे संभावित परिणाम क्या होगा?
यह लेख अखिलेश गुरुरानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर्स परीक्षा में सफलता पाएं’ के अनुभाग ‘1.3 — विभिन्न परिसंपत्ति श्रेणियाँ (एसेट क्लास)’ का पूरक (companion) अध्याय है। पुस्तक का संपूर्ण संस्करण अमेज़न किंडल (Amazon Kindle) पर उपलब्ध है।
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